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Current Affairs 26.09.2018

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Created: 26 Sep 2018

केंद्र सरकार द्वारा भारतीय सेना के प्रमुख युद्धक टैंक टी-72 के लिए 1,000 इंजन की खरीद को मंजूरी दी है जिस पर 23,000 करोड रूपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है.

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में इस खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. परिषद ने रक्षा सौदों के अमल में होने वाली देरी और प्रक्रियागत जटिलताओं को कम करने के लिए रक्षा खरीद प्रक्रिया में कुछ संशोधनों को भी मंजूरी दी. 

रक्षा खरीद परिषद की बैठक के प्रमुख तथ्य

•    इन इंजनों की खरीद से टी-72 टैंकों में गतिशीलता, फुर्ती और गति में इजाफा होगा और     युद्ध क्षेत्र में वे और ज्यादा प्रभावशाली साबित होंगे. 

•    मंत्रालय के अनुसार टी-72 टैंकों में लगाए जाने वाले 1,000 बीएचपी के 1,000 इंजनों की खरीद को मंजूरी दी गई है. इस पर तकरीबन 2300 करोड़           रूपये की लागत आएगी.

•    केंद्रीय सैन्य पुलिस बल (सीएपीएफ) और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) जैसे अन्य संगठनों की खरीद को शामिल कर लिया गया है. इससे रक्षा सौदों को       अमली जामा पहनाने में लगने वाले समय में कमी आयेगी.

•    इसके अलावा रक्षा खरीद परिषद ने इस तरह की खरीदारी के लिए नियमावली के तौर पर काम करने वाली रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी)-16 में भी कुछ           संशोधन के करने की मंजूरी दी है

•    इसके तहत संशोधित ऑर्डर को मूल सौदे की वारंटी की अवधि पूरा होने के पांच साल में पूरा करना होगा.

रक्षा खरीद परिषद

देश की रक्षा एवं सुरक्षा हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए 11 अक्टूबर 2001 को रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्थापना की गई थी. रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी.

डीएसी की संरचना

रक्षा मंत्री: अध्यक्ष, रक्षा राज्य मंत्री: सदस्य, सेना प्रमुख के प्रमुख: सदस्य, नौसेना प्रमुख के प्रमुख: सदस्य, प्रमुख वायु कर्मचारी: सदस्य, रक्षा सचिव: सदस्य, सचिव रक्षा अनुसंधान एवं विकास: सदस्य, सचिव रक्षा उत्पादन: सदस्य

रक्षा खरीद परिषद का उद्देश्य मांग की गई क्षमताओं के संदर्भ में सशस्त्र बलों के अनुमोदित आवश्यकताओं की शीघ्र खरीद, और आवंटित बजटीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करके, निर्धारित समय सीमा को सुनिश्चित करना है.

 केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा 23 सितंबर 2018 को राजस्थान मं  एक कार्यक्रम में घोषणा की गई कि कक्षाओं को डिजिटल बनाए जाने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रयास आरंभ किये गये हैं. 

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ‘ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड’ के तहत नौवीं से स्नातकोत्तर तक की 15 लाख कक्षाओं को डिजिटल कक्षा का रूप दिया जाएगा. इससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और आमूल चूल परिवर्तन आएगा.

ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड

•    ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड के तहत सभी स्कूलों में अब सफेद ब्लैक बोर्ड लगाए जाएंगे. यह योजना पांच वर्षों में पूरी तरह लागू की जाएगी. 

•    इससे देश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी. 

•    इस योजना को केंद्र राज्य और नागरिक समुदाय तथा कार्पोरेट सामाजिक दायित्व से लागू किया जाएगा.

•    डिजिटल बोर्ड की कीमत में कमी लाने के प्रयास भी किये जायेंगे. महाराष्ट्र नागरिक सामुदाय ने छह जिलों में 300 करोड़ रुपए स्कूलों के लिए एकत्र किए हैं. यह उपक्रम सभी राज्यों में शुरू किया गया है.

पृष्ठभूमि

इससे पूर्व भारत में ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड चलाया गया था जिसे 1987 में आरंभ किया गया था. इस योजना का उद्देश्य प्राथमिक कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों की सुविधा के लिए आवश्यक संस्थागत उपकरण एवं सामग्रियां प्रदान करना निर्धारित किया गया है. इस योजना में उस स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक के लिए वेतन का प्रावधान है जहां लगातार दो वर्षों तक 100 से अधिक नामांकन आये हों. इस योजना को नौंवी पंचवर्षीय योजना के दौरान लागू किया गया था.