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Current Affairs 19.09.2018

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Created: 19 Sep 2018

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 17 सितम्बर 2018 को शेयरों को वापस खरीदने (बायबैक) के नियमों में संशोधन किया है. इसका उद्देश्य शेयर बायबैक के लिए सार्वजनिक रूप से कोई घोषणा करने की जरूरत पर और ज्यादा स्पष्टता लाना है.

सेबी के अनुसार क्रेडिट रेटिंग संस्थाएं पब्लिक या राइट्स इश्यू के जरिये ऑफर की गई सिक्युरिटीज की रेटिंग के अलावा और किसी भी तरह की गतिविधि में शामिल नहीं होंगी.

मुख्य तथ्य:

•   सेबी के मुताबिक रेटिंग कंपनी को वित्तीय प्रतिभूतियों की रेटिंग तय करने और आर्थिक अथवा वित्तीय शोध एवं विश्लेषण कार्य अलावा दूसरे कामों को अलग       कंपनी में बांटने का नियम लागू किया है. इसके लिए दो साल का समय दिया गया है.

•   नए नियमों के तहत सेबी ने भगोड़े आर्थिक अपराधियों को किसी कंपनी में शेयर खरीदने या ओपन ऑफर में बोली लगाने से प्रतिबंधित कर दिया है.

•   सेबी ने 11 सितंबर को जारी अधिसूचना में कहा कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी किसी भी कंपनी के ओपन ऑफर के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बोली नहीं         लगा सकता है. इसके साथ ही कंपनी अधिनियम 2013 के अनुरूप ‘मुक्त आरक्षित भंडार’ के बारे में स्पष्टीकरण को नये ढांचे में शामिल किया गया है.

•   सेबी ने भाषा के सरलीकरण, अस्पष्टता खत्म करने और अप्रैल 2014 में अस्तित्व में आए नए कंपनी कानून के हिसाब से नए रेफरेंस जोड़ने के लिए शेयर           बायबैक के नियमों में संशोधन किया है.

•   कोई भी कंपनी जिसे शेयरों की वापस खरीद की अनुमति दी जाती है उसे दो कार्यदिवसों के भीतर इसकी सार्वजनिक घोषणा करनी होगी.

                            भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी):

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) भारत में प्रतिभूति और वित्त का नियामक बोर्ड है. इसकी स्थापना सेबी अधिनियम 1992 के तहत 12 अप्रैल 1992 में हुई. सेबी का मुख्यालय मुंबई में हैं और क्रमश: नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में क्षेत्रीय कार्यालय हैं.

सेबी के अस्तित्व में आने से पहले पूंजी निर्गम नियंत्रक नियामक प्राधिकरण था, जिसे पूंजी मुद्दे (नियंत्रण) अधिनियम, 1947 के अंतर्गत अधिकार प्राप्त थे. सेबी का प्रमुख उद्देश्य भारतीय स्टाक निवेशकों के हितों का उत्तम संरक्षण प्रदान करना और प्रतिभूति बाजार के विकास तथा नियमन को प्रवर्तित करना है.

बायबैक क्या है?

बायबैक एक निर्धारित समय में पूरी की जाने वाली एक प्रक्रिया है जिसमें निवेशकों के अतिरिक्त शेयरों को अपने सरप्लस का इस्तेमाल कर खुले बाजार से खरीदा जाता है. ये शेयर बाजार मूल्य या उससे ज्यादा कीमत पर खरीदे जाते हैं.

अधिसूचना के मुताबिक कंपनी निदेशक मंडल की बायबैक के लिये मंजूरी मिलने और इस पेशकश को स्वीकार करने वाले शेयरधारकों को भुगतान मिलने की तिथि को बायबैक अवधि के तौर पर परिभाषित किया गया है.

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (यूएनआईजीएमई) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया है कि वर्ष 2017 में शिशु मृत्यु दर पिछले पांच वर्षों में सबसे कम दर्ज की गई हैं. इससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.
यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि यासमीन अली हक ने कहा है कि शिशु मृत्यु दर के मामले में भारत में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है. ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत में जन्म से लेकर पांच वर्ष आयु वर्ग तक के बच्चों की मृत्यु दर इसकी इसी आयु वर्ग के जन्म दर के समान है.

संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
•    यूएनआईजीएमई की रिपोर्ट के अनुसार भारत में वर्ष 2017 में 6,05,000 नवजात शिशुओं की मौत दर्ज की गई, जबकि पांच से 14 साल आयु वर्ग के            1,52,000 बच्चों की मृत्यु हुई.
•    भारत में वर्ष 2017 में कुल 8,02,000 बच्चों की मौत हुई और यह आंकड़ा पांच वर्ष में सबसे कम है.
•    वर्ष 2016 में भारत में शिशु मृत्यु दर 44 शिशु प्रति 1,000 थी. यदि लैंगिक आधार पर शिशु मृत्यु दर की बात करें, तो 2017 में लड़कों में यह प्रति             1,000 बच्चे पर 30 थी, जबकि लड़कियों में यह प्रति 1,000 बच्चियों पर 40 थी.
•    अस्पतालों में प्रसव में वृद्धि, नवजात शिशुओं के देखभाल के लिए सुविधाओं का विकास और टीकाकरण होने से शिशु मृत्यु दर में कमी आयी है.
•    पिछले पांच वर्षों में लिंगानुपात में सुधार आया है और बालिकाओं के जन्म और जीवन प्रत्याशा दर में वृद्धि हुई है.
•    यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या विभाग और विश्व बैंक समूह की ओर से जारी मृत्यु दर के नये अनुमानों के मुताबिक 2017 में 15           साल  से कम आयु के बच्चों में ज्यादातर की मौतों को रोका जा सकता था, या उनकी तकलीफों का इलाज किया जा सकता था.

शिशु मृत्यु दर
शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जीवित जन्में शिशुओं में से एक वर्ष या इससे कम उम्र मे जीवित न बच पाने वाले शिशुओं की संख्या है. परंपरागत रूप से दुनिया भर में शिशु मृत्यु का सबसे आम कारण दस्त से हुआ निर्जलीकरण है. दुनिया भर में माताओं को नमक और चीनी के घोल के बारे में दी गयी जानकारी की वजह से शिशुओं के निर्जलीकरण से मरने की दर में और कमी की दर्ज की गई है. 1990 के दशक के अंत तक निर्जलीकरण से शिशुओं की मृत्यु, शिशु मृत्यु की दूसरी सबसे आम वजह थी. अधिक विकसित देशों में शिशु मृत्यु के प्रमुख कारणों जन्मजात विकृति, संक्रमण और एस आई डी एस शामिल हैं.

जापान ने पहली बार विवादित दक्षिण चीन सागर में पनडुब्बी अभ्यास किया है. यह सैन्य अभ्यास हालांकि चीन के दावे वाले जलक्षेत्र से दूर किया गया.

मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स की पनडुब्बी कुरोशियो ने अन्य जंगी जहाजों के साथ दक्षिण चीन सागर में सैन्य अभ्यास किया.

मुख्य तथ्य:

•   इस सैन्य अभ्यास में कागा हेलीकॉप्टर पोत समेत जापानी युद्धपोतों ने भी हिस्सा लिया. यह पोत इस समय दो महीने के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया और हिद            महासागर क्षेत्र की यात्रा पर है.

•   यह पहला मौका है जब जापानी नौसेना ने दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में सैन्य अभ्यास शुरू किया है.

•   रक्षा मंत्रालय ने एक अन्य बयान में कहा कि 80 चालकों के साथ कुरोशियो पनडुब्बी 17 सितम्बर 2018 से केम रान्ह खाड़ी के समीप वियतनाम के                सामरिक नौसेना ठिकाने पर पांच दिनों तक रहेगा.

चीन ने जापान को चेतावनी दी:

अधिकतर समुद्री इलाके पर अपना दावा करने वाले चीन ने जापान को चेतावनी दी है कि वह ऐसा कोई कदम ना उठाए जिससे इलाके में शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचे.

दक्षिण चीन सागर पर दावा:

चीन तकरीबन पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है. इस दावे को मजबूती देने के लिए उसने कई कृत्रिम द्वीपों पर सैन्य ठिकाने भी बना रखे हैं. दक्षिण चीन सागर से हर साल पोतों के जरिए पांच खरब अमेरिकी डॉलर का कारोबार होता है.

चीन द्वारा वर्ष 2012 में फिलीपीन से जब्त किए जाने के बाद से ही स्कारबॉरो शोल को लेकर क्षेत्र में काफी तनाव की स्थिति बनी हुई है. पनडुब्बी का अभ्यास दक्षिण चीन सागर में टोक्यो की तरफ से की गई पहली ऐसी कवायद थी.

दक्षिण चीन सागर पर ये देश भी करते हैं अपना दावा:

चीन वैसे तो पूरे दक्षिण चीन सागर पर ही अपने अधिकार का दावा करता है, लेकिन ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और ताइवान भी उस पर अपना दावा करते हैं. इस क्षेत्र में स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका भी सैन्य अभ्यास कर चुका है. पिछले माह (अगस्त 2018) ब्रिटेन की नौसेना का युद्धपोत एचएमएस एल्बियन दक्षिण चीन सागर में चीन के दावे वाले द्वीपों के पास से गुजरा था.