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Current Affairs 15.02.2019

In: India
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Created: 19 Feb 2019

संयुक्त राष्ट्र ने चंद्रमौली रामनाथन को कंट्रोलर और एएसजी नियुक्त किया

 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भारत के चंद्रमौलि रामनाथन को कंट्रोलर, सहायक महासचिव (कार्यक्रम और योजना), बजट तथा वित्त विभाग में नियुक्त किया है. इसके साथ ही वह वित्त प्रबंध स्ट्रेटजी के कार्य की भी देखरेख करेंगे.

इससे पहले चंद्रमौली संयुक्त राष्ट्र के कई विभागों में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं. गौरतलब है कि चंद्रमौली को वित्त, बजट, प्रबंधन और सूचना प्रौद्योगिकी के मामलों में चार दशकों का अनुभव है.

 

चंद्रमौली रामनाथन के बारे में जानकारी

  • रामनाथन भारत में वर्ष 1993 से 1995 तक असिस्टेंट ऑडिटर तथा 1989 से 1993 तक ऑडिटर जनरल ऑफ़ इंडिया पद पर कार्यरत रहे थे.
  • इसके अतिरिक्त उन्होंने डिप्टी कंट्रोलर, डायरेक्टर ऑफ़ एकाउंट्स डिवीज़न एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवा विभाग में सेवा प्रमुख पद पर रहे थे.
  • सितंबर 2018 तक वे सक्रिय कंट्रोलर पद पर तैनात रहे इसके अतिरिक्त वे असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल फॉर एंटरप्राइज भी रहे हैं.
  • उन्हें वित्त-बजट, प्रबंधन एवं नीति निर्माण में 40 वर्षों का वृहद अनुभव प्राप्त है.

 

संयुक्त राष्ट्र प्रबंधन, रणनीति, नीति और अनुपालन विभाग

1 जनवरी 2019 को शुरू किए गए प्रबंधन, रणनीति, नीति और अनुपालन विभाग (DMSPC) का लक्ष्य स्पष्ट, एकीकृत वैश्विक प्रबंधन रणनीति और नीति ढांचे के माध्यम से प्रबंधन के सभी क्षेत्रों में रणनीतिक नीति नेतृत्व प्रदान करना है. यह विभाग प्रासंगिक तरीके से अंतर सरकारी / अंतर निकाय और स्टाफ-प्रबंधन तंत्र में महासचिव का प्रतिनिधित्व करता है. बजट और वित्तीय रिपोर्टिंग के अतिरिक्त आचरण और अनुशासन सहित मानव संसाधन नीति और रणनीति को डीएमएसपीसी में समेकित किया गया है.

 

दुनिया भर में युद्ध से हर साल 1,00,000 बच्चों की मौत: सेव द चिल्ड्रेन की रिपोर्ट

विश्व के प्रसिद्ध गैर सरकारी संगठन ‘सेव द चिल्ड्रन इंटरनेशनलद्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध और उसके प्रभाव की वजह से हर साल कम से कम एक लाख बच्चों की मौत हो जाती है. इसमें भूख और मदद ना मिलने जैसे प्रभाव शामिल हैं.

एनजीओ की रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमानतः 10 युद्धग्रस्त देशों में 2013 से 2017 के बीच युद्ध की वजह से 5.5 लाख बच्चे दम तोड़ चुके हैं. संगठन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी थोरिंग श्मिट ने एक बयान में कहा, ‘हर पांच में से करीब एक बच्चा संकटग्रस्त इलाकों में रह रहा है. बीते दो दशक में यह सबसे बड़ी संख्या है.’

 

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • सेव द चिल्ड्रन ने कहा कि उसने ओस्लो स्थित पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के साथ अध्ययन में पाया कि 2017 में 42 करोड़ बच्चे संकटग्रस्त इलाकों में रह रहे थे.
  • यह दुनिया भर के बच्चों की संख्या का 18 फीसदी हिस्सा है और बीते साल के मुकाबले इसमें 3 करोड़ बच्चों का इजाफा हुआ है.
  • इन संकटग्रस्त इलाकों में अफगानिस्तान, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो, इराक, माली, नाइजीरिया, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सीरिया और यमन देश शामिल हैं.
  • रिपोर्ट के मुताबिक इन बच्चों की मौत युद्ध और उसके प्रभावों से हुई है, जिसमें भूख, अस्पतालों और बुनियादी ढाचों को हुआ नुकसान, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच की कमी, स्वच्छता और मदद नहीं मिल पाने जैसे कारण शामिल हैं.
  • वर्ष 2017 में करीब 42 करोड़ बच्चे इन क्षेत्रों में रह रहे थे. यह दुनियाभर के बच्चों का 18 प्रतिशत है. वर्ष 2016 के मुकाबले 2017 में इनकी संख्या में तीन करोड़ का इजाफा हुआ था.
  • रिपोर्ट के अनुसार युद्ध में घायल हुए और मारे गए बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ी है.
  • संस्था की सीईओ थोरिंग श्मिट ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, यह शर्मनाक है कि 21 वीं सदी में हम पीछे की तरफ जा रहे हैं और अपनी नैतिकता खो चुके हैं.

 

सेव द चिल्ड्रेन के बारे में

सेव द चिल्ड्रेन विश्व के सबसे पुराने बाल अधिकार संगठनों में से एक है. इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्र से भी पहले वर्ष 1919 में हुई थी. यह भारत में वर्ष 2008 से कार्यरत है. भारत के 18 राज्यों में यह अब तक 6.1 मिलियन बच्चों तक अपनी पहुंच बना चुका है. यह एनजीओ बच्चों को आपात स्थिति के दौरान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा,  शोषण से सुरक्षा और जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिए भारत और शहरी क्षेत्रों के दूरस्थ कोनों में विभिन्न कार्यक्रम चलाता है. यह बच्चों के सर्वोत्तम हित के लिए नीतियों में बदलाव लाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करता है. विश्व स्तर पर, सेव द चिल्ड्रेन 120 देशों में मौजूद है और वहां रहने वाले बच्चों की स्थिति को सुधारने के लिए काम करता है.

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