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Current Affairs 14.09.2018

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Created: 14 Sep 2018

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के अगले प्रधान न्यायाधीश के तौर पर 13 सितंबर 2018 को जस्टिस रंजन गोगोई के नाम को मंजूरी प्रदान की. कानून मंत्रालय ने एक अधिसूचना में यह जानकारी जारी की है.
जस्टिस गोगोई देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश होंगे. वे न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा के प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद 03 अक्तूबर 2018 को कार्यभार संभालेंगे. जस्टिस गोगोई का कार्यकाल 13 महीने का होगा और वे 17 नवंबर 2019 को रिटायर होंगे.
जस्टिस रंजन गोगोई के बारे में जानकारी
•    जस्टिस रंजन गोगोई 28 फरवरी 2001 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के जज बने थे. इसके बाद 12 फरवरी 2011 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का              मुख्य न्यायाधीश बनाया गया.
•    अप्रैल 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया. 
•    वे असम के रहने वाले हैं, उन्हें मृदुभाषी, लेकिन बेहद सख्त जज माना जाता है.
•    वे पूर्वोत्तर भारत से देश के पहले प्रधान न्यायाधीश होंगे. वे इस समय सुप्रीम कोर्ट में असम की एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजन) अपडेट करने         की प्रक्रिया की निगरानी कर कर रहे हैं. 
•    गौरतलब है कि पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट की प्रणाली पर सवाल उठाने वाले जजों में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई भी शामिल थे.
मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति
•    भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अधिनियम संख्या 124 के दूसरे सेक्शन के अंतर्गत होती है. ये पद            भारतीय गणतंत्र का सबसे ऊंचा न्यायिक पद होता है. 
•    सर्वोच्च न्यायालय के भावी चीफ जस्टिस को तात्कालिक समय में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जजों में होना अनिवार्य है. पुराने चीफ जस्टिस के सेवा निवृत             और नये मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के समय भारत के क़ानून मंत्री तथा जस्टिस और कंपनी अफेयर्स का उपस्थित होना आवश्यक है.
•    मुख्य न्यायाधीश के जज के चयन के बाद जस्टिस अफेयर्स और कानून मंत्री सारा ब्यौरा भारत के तात्कालिक प्रधानमन्त्री के हाथ सौंपते हैं. भारत के                  प्रधानमंत्री उन ब्योरों के मद्देनज़र देश के राष्ट्रपति को चीफ जस्टिस की नियुक्ति के मामले में अपनी राय देते हैं.
•    भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 30 अन्य न्यायधीश और मौजूद होते हैं.

संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (दिल्ली सर्किल) ने खिड़की मस्जिद के परिसर से तांबे के 254 सिक्कों का खजाना खोजा है. उस समय मस्जिद के संरक्षण का काम चल रहा था. 

यह मस्जिद नई दिल्ली स्थित खिड़की गांव के दक्षिणी छोर पर स्थित है. मस्जिद का निर्माण फिरोज शाह तुगलक (1351-88) के प्रधानमंत्री खान-ए-जहान जुनान शाह ने करवाया था. माना जाता है कि यह मस्जिद उनके द्वारा निर्मित 7 मस्जिदों में से एक है.

कैसे हुई खोज?

एएसआई ने खिड़की मस्जिद के संरक्षण के लिए क्षेत्र की सफाई शुरू की थी. सफाई के दौरान उसे मस्जिद के प्रवेश द्वार के निकट मध्यकालीन भारत के 254 तांबे के सिक्कों का खजाना मिला. रातत्वशास्त्रियों का एक दल, संरक्षण सहायक और फोटोग्राफर तुरंत स्थल पर पहुंचे तथा सिक्कों को अपने कब्जे में लिया. एएसआई की विज्ञानशाखा के विशेषज्ञों ने कुछ सिक्कों को साफ किया. प्रारंभिक जांच के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ये सिक्के शेरशाह सूरी और उनके उत्तराधिकारियों के शासन के हैं.

मुख्य बिंदु
•    एएसआई को प्राप्त हुए यह सिक्के एक मिट्टी के घड़े में मिले थे. 
•    सिक्कों पर दोनों तरफ अभिलेख हैं, संभवतः अरबी या फारसी भाषा में हैं. उनका क्या अर्थ है, यह अभी मालूम नहीं है. 
•    प्राचीन काल में सभी सिक्के एक ही आकार और वजन के नहीं हुआ करते थे, इन सिक्कों के आकार और वजन भी अलग-अलग हैं. उनका मूल्य आंका              जाना  बाकी है.
•    उल्लेखनीय है कि 2003 में भी इसी परिसर की सफाई और संरक्षण के दौरान 63 सिक्के मिले थे. 
•    दिल्ली सर्किल ने पुरातत्वशास्त्रियों की तकनीकी देखरेख में क्षेत्र की वैज्ञानिक सफाई शुरू कर दी है. सिक्कों को साफ करने के बाद विशेषज्ञों की मदद से उन        पर लिखी इबारत को पढ़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

 

खिड़की मस्जिद के बारे में
खिड़की मस्जिद खुरदरे पत्थरों से बनी 2 मंजिला इमारत है. निचली मंजिल पर कई छोटी-छोटी कोठरियां बनी हुई हैं. चारों कोनों पर खंबे हैं, जिनसे यह इमारत बहुत मजबूत प्रतीत होती है। पश्चिम दिशा को छोड़कर मस्जिद में तीन दरवाजे हैं और चारों तरफ मीनारें बनी हुई हैं. मुख्य दरवाजा पूर्व की दिशा में खुलता है. ऊपरी मंजिल पर झिर्रीदार खिड़कियां बनी हैं, जिसके कारण इसका नाम खिड़की मस्जिद पड़ा है.