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Current Affairs 13.12.2018

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Created: 14 Dec 2018

13 दिसंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

1232 - गुलाम वंश के शासक इल्तुतमिश ने ग्वालियर पर कब्जा किया।

1916 - आस्ट्रिया के टायरॉल में हिमस्खलन से 24 घंटे में 10,000 ऑस्ट्रियाई और इतालवी सैनिकों की मौत। 1920 - नीदरलैंड के हेग में लीग ऑफ नेशंस का अंतरराष्ट्रीय न्यायालय स्थापित।

1921 - बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का उद्घाटन 'प्रिंस ऑफ वेल्स' ने किया था।

1937 - चीन और जापान के बीच हुए नानज़िंग के युद्ध में जापानियों की जीत हुई। इसके बाद लंबे समय तक नरसंहार और अत्याचार का दौर चला।

1955 - भारत और सोवियत संघ ने पंचशील समझौते को स्वीकार किया।

1959 - आर्क विशप वकारियोस साइप्रस के प्रथम राष्ट्रपति चुने गए।

1961 - मंसूर अली ख़ान पटौदी ने अपना टेस्ट मैच करियर दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ शुरू किया था।

1974 - माल्टा गणतंत्र बना।

1981 - पोलैंड में सेना द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा।

1989 - गृह मंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद की बेटी को आतंकवादियों के चंगुल से छुड़ाने के बदले पांच कश्मीरी आतंकवादियों को जेल से रिहा किया गया।

1996 - कोफी अन्नान संयुक्त राष्ट्र के महासचिव चुने गये।

1998 - महात्मा रामचन्द्र वीर को कोलकाता के बड़ा बाज़ार लाइब्रेरी की ओर से "भाई हनुमान प्रसाद पोद्दार राष्ट्र सेवा" पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

2001 - दिल्ली स्थित भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला। इस्रायल ने यासर अराफात से सम्पर्क तोड़े।

2002 - यूरोपीय संघ ने तुर्की के साथ एक बहुप्रतीक्षित समझौते को अपनी मंजूरी दी। यूरोपीय संघ का विस्तार किया गया। साइप्रस, चेक गणराज्य, एस्टोनिया, हंगरी, लातेविया, लिथुआनिया, पोलैंड, स्लोवाकिया और स्लोविनिया इसमें शामिल किए गए।

2003 - भूतपूर्व इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को उनके गृह नगर टिगरीट के निकट गिरफ्तार कर लिया गया। 2004 - इस्लामाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु और सर क्रीक पर वार्ता प्रारम्भ। भूतपूर्व चिली तानाशाह जनरल अगस्टो पिनोसे अपहरण और नरसंहार के नौ आरोप लगने के बाद घर में नजरबंद कर दिए गए।

2006 - 150वें सदस्य के रूप में वियतनाम को शामिल करने हेतु विश्व व्यापार संगठन द्वारा अधिसूचना जारी। 2007 - श्रीलंकाई सेना व लिट्टे के मध्य हुए संघर्ष में 17 लिट्टे उग्रवादी मारे गये।

2008- जम्मू-कश्मीर के पाँचवें चरण के लिए 11 विधानसभा क्षेत्रों में 57% मतदान हुआ।

2012- नेत्रहीन ट्वेंटी-20 विश्वकप के फ़ाइनल मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान को 30 रनों से हराकर विश्व विजेता का खिताब अपने नाम कर लिया।

 

13 दिसंबर को जन्मे व्यक्ति

1925 - लक्ष्मीचंद जैन - भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री थे।

1903 - इलाचन्द्र जोशी - हिन्दी में मनोवैज्ञानिक उपन्यासों के आरम्भकर्ता।

 

13 दिसंबर को हुए निधन

1048 - अलबेरूनी - एक फ़ारसी विद्वान् लेखक, वैज्ञानिक, धर्मज्ञ तथा विचारक।

1986 - स्मिता पाटिल - हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री

 

13 दिसंबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह (08-14 दिसम्बर)

हवाई सुरक्षा दिवस (सप्ताह)

दुष्कर्म पीड़िता की पहचान मौत के बाद भी उजागर न करें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़ताओं के साथ समाज में होने वाले भेदभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता की पहचान मौत के बाद भी उजागर नहीं की जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िताओं की पहचान उजागर किए जाने को लेकर निराशा जाहिर करते हुए 11 दिसंबर 2018 को अहम आदेश जारी किया है.

 

जस्टिस मदन बी लोकुर व जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि जीवित या मृत किसी भी दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करने पर पूर्ण प्रतिबंध है. इसका अर्थ है कि मीडिया, पुलिस या अन्य किसी के द्वारा दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की जा सकेगी.

 

मुख्य तथ्य

 

  • सुप्रीम कोर्ट ने इससे संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं और देश के हर राज्य के प्रत्येक जिले में दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास के लिए वन स्टॉप सेंटर बनाने का निर्देश जारी किया है.

 

  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की कॉपी देश की सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरलों को और सभी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड अध्यक्षों को भिजवाने के लिए आदेश जारी किया है, ताकि उनके आदेशों पर अमल किया जा सके.

 

 जस्टिस दीपक गुप्ता का कथन

 

जस्टिस दीपक गुप्ता ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर करके उसके सम्मान का हनन इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वह मृत है और इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पीड़िता भले ही मृत हो, कोमा में जा चुकी हो या जीवित हो, किसी भी सूरत में उसकी पहचान उजागर नहीं होनी चाहिए. यदि उनके परिजन नाम उजागर करने की सहमति भी दे तो भी उनकी पहचान उजागर नहीं की जा सकती. केवल जज ही तय कर सकते हैं हैं कि दुष्कर्म पीड़ित का नाम उजागर हो या न हो.

 

 जस्टिस मदन बी लोकुर का कथन

 

समाज दुष्कर्म पीड़िताओं से अछूत की तरह व्यवहार करने लगता है. पुलिस ऐसे सवाल उठाती है जैसे अपराध उसी की वजह से हुआ. उनसे कोर्ट में कठोर सवाल पूछे जाते हैं. यह अहसास कराया जाता है कि जो उसके साथ हुआ है, वह उसी की गलती के कारण हुआ है.

 

 

  • सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को भी निर्देश जारी करते हुए कहा है कि रेप और पॉक्सो एक्ट के मामलों में पुलिस एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड न करे. फोरेंसिक लैब भी सीलबंद लिफाफे या कवर में ही रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे.

 

  • सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया को कहा है कि किसी घटना को न केवल रिपोर्ट करने का अधिकार मीडिया का होता है बल्कि यह उसकी ड्यूटी भी है. मीडिया का दायित्व है कि वह रेप मामलों को लेकर सनसनी न फैलाये. मीडिया कर्मियों को रेप पीड़िता के साक्षात्कार से भी बचना चाहिए.

 

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