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Current Affairs 13.02.2019

In: India
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Created: 14 Feb 2019

मैथिली भाषा के संरक्षण हेतु दरभंगा में पांडुलिपि केंद्र की स्थापना होगी

 

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार मैथिली भाषा अथवा मिथिलाक्षर के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए दरभंगा में पांडुलिपि केंद्र की स्थापना होगी.

गौरतलब है कि 19 मार्च 2018 को जदयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें मैथिली के विकास के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग उन्होंने रखी थी. उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्री से इसके लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की थी, जिस पर मंत्री ने मैथिली विद्वानों के नाम का सुझाव देने के लिए कहा था.

 

मैथिली भाषा के संरक्षण हेतु घोषणा

  • मिथिलाक्षर के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए दरभंगा में पांडुलिपि केंद्र की स्थापना होगी.
  • यह केंद्र ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय या कामेश्वर सह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में से किसी एक परिसर में स्थापित होगी.
  • मिथिलाक्षर का उपयोग आसान हो, इसके लिए लिपि को भारतीय भाषाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास संस्थान के द्वारा जल्द से जल्द कम्यूटर की भाषा (यूनिकोड) में परिवर्तित करने का काम पूरा किया जाएगा.
  • साथ ही मिथिलाक्षर लिपि को सीखने के लिए ऑडियो-विजुअल तकनीक भी विकसित की जाएगी.

 

समिति और उसके सुझाव

  • चार सदस्यीय समिति में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो. रमण झा, कामेश्वर सह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ. पं. शशिनाथ झा, ललित नाराय़ण विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रो. रत्नेश्वर मिश्र व पटना स्थित महावीर मंदिर न्यास के प्रकाशन विभाग के पदाधिकारी पं. भवनाथ झा को शामिल किया गया.
  • समिति ने अपनी रिपोर्ट में अतिप्राचीन लिपि को बचाने के लिए कई सुझाव दिए हैं.
  • केंद्रीय मंत्री ने अधिकांश सुझावों पर अपनी सहमति देते हुए जल्द से जल्द उन पर काम करने का आश्वासन दिया था.
  • इस बैठक में मिथिला और मैथिली के विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया था.

भारतीय इतिहासकार संजय सुब्रमण्यम इज़राइल के डेन डेविड पुरस्कार हेतु चयनित

भारतीय इतिहासकार संजय सुब्रमण्यम को इज़राइल के प्रतिष्ठित डेन डेविड पुरस्कार के लिए चुना गया है. चयनकर्ताओं का मानना है कि संजय सुब्रमण्यम के अपने काम से इतिहास के क्षेत्र में विश्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया है इसलिए डेन डेविड पुरस्कार के लिए उनका चयन किया गया है.

प्रारंभिक आधुनिक युग के दौरान एशियाई, यूरोपीय और उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका के लोगों के बीच अंतर-सांस्कृतिक संपर्क पर काम के लिए उन्हें इस साल के डेव डेविड पुरस्कार के लिए चुना गया है. स्ट्रैटिजिक एनालिस्ट के. सुब्रमण्यम के बेटे और पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर के भाई संजय ने वृहत इतिहास में अपने काम के लिए ‘अतीतकालीन आयामश्रेणी में यह अवॉर्ड जीता है.

 

संजय सुब्रमण्यम को डेन डेविड पुरस्कार

  • इस इज़रायली अवार्ड के साथ इतिहासकारों को 10 लाख अमेरिकी डॉलर भी दिए जाएंगे.
  • इज़रायल के इस डेन डेविड पुरस्कार से विश्वभर के उन लोगों को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने विज्ञान, टेक्नोलॉजी और मानवतावाद के क्षेत्र में काफी अहम उपलब्धियों हासिल की हों.
  • उनके साथ इस श्रेणी में एक और इतिहासकार को भी डेव डेविड पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है.
  • संजय सुब्रमण्यम अपने अवार्ड को शिकागो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर केनेथ पोमेरांज के साथ साझा करेंगे.

 

डेन डेविड पुरस्कार

वर्ष 2000 में 100 मिलियन डॉलर की राशि के साथ इज़राइली बिजनेसमैन एवं समाजसेवी डेन डेविड द्वारा डेन डेविड फाउंडेशन की शुरुआत की गई. इस संस्था के सह-संस्थापक एवं पहले निदेशक प्रोफेसर गैडबर्ज़िलाई थे. यह फाउंडेशन तथा तेल अवीव यूनिवर्सिटी मिलकर प्रत्येक वर्ष पुरस्कार प्रदान करते हैं. पहला पुरस्कार वितरण समारोह तेल अवीव यूनिवर्सिटी में मई 2002 में हुआ था.

डेन डेविड पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिया जाता है – भूतकाल, वर्तमान तथा भविष्यकाल. वर्ष 2002 में दिए गये पहले तीन पुरस्कार थे – वारबर्ग लाइब्रेरी (भूतकाल), डेनियल हिल्स (वर्तमान) एवं सिडनी ब्रेनर एवं रोबर्ट वाटरस्टन (भविष्य). यह पुरस्कार अभिनव एवं अतुल्नीय शोध कार्य पर दिया जाता है.

 

 

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