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Current Affairs 05.11.2018

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Created: 05 Nov 2018

5 नवंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

 

1556 - पानीपत के दूसरे युद्ध में मुग़ल शासक अकबर ने हेमू को हराया।

1630 - स्पेन और इंग्लैंड के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर।

1639 - मैसाच्युसेट्स में पहले डाकघर की स्थापना।

1678 - जर्मनी की विशेष सेना ब्रैंडनबर्गर्स ने स्वीडन में ग्रीफ्सवाल्ड शहर पर कब्जा जमाया।

1725 - स्पेन और आस्ट्रिया ने गुप्त समझौते पर हस्ताक्षर किये।

1811 - स्पेन के खिलाफ मध्य अमेरिकी देश अल सल्वाडोर का प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष।

1854 - क्रीमिया के युद्ध में ब्रिटिश और फ्रांस की संयुक्त सेना ने इकेरमान में रूसी सेना को पराजित किया।

1872 - उल्येसेस एस ग्रांट अमेरिका के दूसरी बार राष्ट्रपति निर्वाचित।

1914 - इंग्लैंड एवं फ्रांस द्वारा तुर्की के विरुद्ध युद्ध की घोषणा।

1920 - इंडियन रेडक्राॅस सोसाइटी की स्थापना।

1930 - अमेरिका के महान् साहित्यकार सिन्क्लेयर लेविस को उनकी कृति ‘बाबित्तके लिये साहित्य का नोबल पुरस्कार मिला। 1951 - नावेदा परमाणु परीक्षण केंद्र में अमेरिका ने परमाणु परीक्षण किया।

1961 - भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने न्यूयार्क की यात्रा की।

1976 - सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण किया।

1985 - 24 वर्ष तक शासन करने के बाद तंजानिया के राष्ट्रपति जूलियस न्येरेरे द्वारा पदत्याग।

1995 - इस्रायल के प्रधानमंत्री यित्जाक रॉबिन की गोली मारकर नृशंस हत्या।

1999 - वेस्टइंडीज के महानतम तेज गेंदबाज़ मैल्कम मार्शल का निधन।

2001 - भारत तथा रूस ने अफ़ग़ान सरकार में तालिबान की भागीदारी नामंजूर की।

2002 - ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने जेल में बंद देश के शीर्ष असंतुष्ट नेता अब्दुल्ला नूरी को आम माफी दी।

2004 - गाजा पट्टी और पश्चिमी तट की चार बस्तियों को ख़ाली करने संबंधी प्रधानमंत्री एरियल शैरोन की योजना को इस्रायली संसद ने मंजूरी दी।

2006 - इराक के उच्चाधिकार न्यायाधिकरण ने देश के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मानवता के ख़िलाफ़ अपराध का दोषी पाते हुए फाँसी की सज़ा सुनाई।

2007 - चीन का पहला अंतरिक्ष यान चेंज-1 चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा।

2012 - सीरिया में आत्मघाती बम विस्फाेट में 50 सैनिक मरे।

2013- भारत ने अपने पहले मंगल ग्रह परिक्रमा अभियान (एमओएम) के लिए ध्रुवीय रॉकेट को 5 नवम्बर, 2013 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करके इतिहास रच दिया।

 

5 नवंबर को जन्मे व्यक्ति

 

1870 - चित्तरंजन दास - महान् स्वतंत्रता सेनानी।

1917 - बनारसी दास गुप्ता - हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री तथा स्वतंत्रता सेनानी।

1921 - उदयराजसिंह - हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार

 

5 नवंबर को हुए निधन

1915 - फ़िरोजशाह मेहता - भारतीय राजनेता तथा बंबई नगरपालिका के संविधान (चार्टर) के निर्माता।

1950 - फ़ैयाज़ ख़ाँ - ध्रुपद तथा ख़याल गायन शैली के श्रेष्ठतम गायक

1998 - नागार्जुन रगतिवादी विचारधारा के लेखक और कवि

2008 - बी. आर. चोपड़ा - हिन्दी फ़िल्म निर्माता-निर्देशक

2011 - भूपेन हज़ारिका - भारत के ऐसे विलक्षण कलाकार, जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे।

1982 - विजयदेव नारायण साही, प्रसिद्ध कवि एवं आलोचक।

 

 

  

नासा का केप्लर स्पेस टेलीस्कोप नौ साल तक ग्रहों की खोज के बाद रिटायर

 

नासा का ग्रहों की खोज करने वाला केपलर स्पेस टेलिस्कोप मिशन समाप्त हो गया है. यह दूरबीन नौ साल की सेवा के बाद रिटायर होने वाला है. वैज्ञानिकों ने बताया है कि 2,600 ग्रहों की खोज में मदद करने वाले केपलर दूरबीन का ईंधन खत्म हो गया है इसलिए इसे रिटायर किया जा रहा है.

नासा के अनुसार केप्लर का ईंधन खत्म होने के संकेत करीब दो सप्ताह पहले ही मिले थे. उसका ईंधन पूरी तरह से खत्म होने से पहले ही वैज्ञानिक उसके पास मौजूद सारा डेटा एकत्र करने में सफल रहे. नासा का कहना है कि फिलहाल केप्लर धरती से दूर सुरक्षित कक्षा में है.

तारों के रहने योग्य क्षेत्र:

केपलर ने दिखाया कि रात में आकाश में दिखने वाले 20 से 50 प्रतिशत तारों के सौरमंडल में पृथ्वी के आकार के ग्रह हैं और वे अपने तारों के रहने योग्य क्षेत्र के भीतर स्थित हैं. वर्ष 2009 में स्थापित इस दूरबीन ने अरबों छिपे हुए ग्रहों से अवगत कराया और ब्रह्मांड की समझ को बेहतर बनाया.

टेलिस्कोप:

यह टेलिस्कोप 9.6 साल स्पेस में रहा. 5,30,506 तारों का अवलोकन किया. इसमें से 2,663 ग्रहों की पुष्टि की गई.

केप्लर स्पेस टेलीस्कोप:

  • केप्लर टेलिस्कोप 06 मार्च 2009 को लॉन्च किया गया था. इस टेलिस्कोप में उस वक्त के हिसाब से सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा लगाया गया था.
  • यह यान अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्थान, नासा, का एक अंतरिक्ष यान है. इस यान का काम सूरज से अलग किंतु उसी तरह अन्य तारों के इर्द-गिर्द ऐसे ग़ैर-सौरीय ग्रहों को ढूंढना है जो पृथ्वी से मिलते-जुलते हों.
  • केप्लर मिशन के अंतर्गत केपलर अंतरिक्ष दूरदर्शी पृथ्वी जैसे दिखने वाले ग्रहों और उनके सौरमण्डल की संभावनाओं का पता लगाता था.
  • केप्लर दूरदर्शी ने एक चक्रीय द्विआधारी तारक व्यवस्था की खोज की है. इसके अंतर्गत दो तारे एक दूसरे का चक्कर लगा रहे हैं और एक उपग्रह इन दोनों के चारों ओर चक्कर लगा रहा है. इस सौर मण्डल का नाम केप्लर-16बी और दोनों तारों के नाम क्रमशः 34बी और 35बी है.

 

भारत एवं जापान के प्रतिनिधियों के मध्य हाल ही में 1,817 करोड़ रुपये का पनबिजली समझौता हस्ताक्षरित किया गया. यह समझौता तुरगा पनबिजली परियोजना के लिए किया गया. इस परियोजना के तहत तुरगा पंपडस्टोरेज पनबिजली परियोजना का निर्माण किया जायेगा.

यह आशा की जा रही है कि तुरगा पनबिजली परियोजना के पूरा के होने के बाद पश्चिम बंगाल में औद्योगिक विकास तथा जीवन-यापन स्तर में सुधार देखने को मिल सकता है.

तुरगा पनबिजली परियोजना के प्रमुख तथ्य

•    तुरगा पनबिजली परियोजना समझौते पर भारत सरकार की ओर से केन्द्रीय वित्त मंत्रालय तथा जापान की ओर से जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) के मुख्य प्रतिनिधि कात्सुओ मात्सुमोतो ने हस्ताक्षर किये.

•    इस परियोजना का उद्देश्य विद्युत् मांग को पूरा करना है.

•    इस परियोजना से औद्योगिक गतिविधियों में तेज़ी आएगी.

•    यह माना जा रहा है कि तुरगा पनबिजली परियोजना से पश्चिम बंगाल के स्थानीय क्षेत्रों में बिजली की कमी की समस्या से निजात मिलेगी.

पनबिजली उर्जा क्या होती है?

बहते हुए या गिरते हुए जल की उर्जा से जो विद्युत उत्पन्न की जाती है उसे पनबिजली अथवा जलविद्युत कहते हैं. वर्ष 2005 में विश्व भर में लगभग 816 गीगावाट इलेक्ट्रिकल जलविद्युत उर्जा उत्पन्न की जाती थी जो कि विश्व की सम्पूर्ण विद्युत उर्जा का लगभग 20 प्रतिशत है. यह बिजली उत्पादन प्रक्रिया प्रदूषण रहित होती है पर्यावरण के अनुकूल होती है.

 

पनबिजली उर्जा प्रक्रिया   बाँध के ऊपर एक अग्रताल बनाया जाता है, जहाँ से पानी खुली नहर अथवा नलों द्वारा बिजलीघर तक ले जाया जाता है. यह पानी बिजलीघर में स्थित बड़े बड़े टरबाइनों को चलाता है, जिनसे योजित जनित्रों में विद्युत् शक्ति का जनन होता है. टरबाइन, सीमेंट कंक्रीट के बने ड्राफ़्टट्यूब के मुख पर अवस्थित होता है. पानी गाइड वेन में होता हुआ टरबाइन के ब्लेडों को घुमाता है और इस प्रकार अपने निहित ऊर्जा का टरबाइन के चलाने में उपयोग करता है. चलते हुए टरबाइन की यांत्रिक ऊर्जा विद्युत् ऊर्जा में रूपांतरित कर दी जाती है और इस प्रकार जल में निहित ऊर्जा जलविद्युत् का रूप ले लेती है.

भारत और जापान संबंध
भारत और जापान के बीच 1958 से द्विपक्षीय सम्बन्ध फलीभूत हुए हैं. पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग में काफी वृद्धि हुई है. इससे दोनों देशों के सामरिक, आर्थिक तथा वैश्विक सहयोग में भी सुदृढ़ता देखने को मिली है.