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Current Affairs 04.01.2019

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Created: 04 Jan 2019

4 जनवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

2010- भारत में 'स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया' के आदेश पर शेयर बाज़ारों के खुलने का समय एक घंटा पहले सुबह 9 बजे कर दिया गया।

2009- पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने यूपीए से नाता तोड़ा।

2008 - गुजरात में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी मंत्रीमण्डल में 18 नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी गयी। अमेरिका ने श्रीलंका को सैन्य उपकरणों और सेवाओं की आपूर्ति पर रोक लगायी।

2006 - दुबई के शासक शेख़मकतूम बिन रशीद अल मकतूम का निधन।

2004 - भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाक प्रधानमंत्री जमाली के बीच इस्लामाबाद में वार्ता आयोजित।

2002 - ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भारत पहुँचे।

1999 - मंगल ग्रह पर भाप का विश्लेषण करने हेतु अमेरिकी यान 'मार्स पौसर लैंडर प्रोब' का प्रस्थान।

1998 - बांग्लादेश ने भारत को उल्फा महासचिव अनूप चेतिया को सौंपने से इन्कार किया।

1990 - पाकिस्तान में दो ट्रेनों की टक्कर में करीब 307 लोग मारे गए और उससे दोगुने घायल हुए।

1972 - नई दिल्ली में 'इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिमिनालॉजी एंड फारेंसिक साइंस' का उद्घाटन।

1966 - भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के जनरल अयूब खान के बीच भारत-पाकिस्तान सम्मलेन की शुरूआत।

 

4 जनवरी को जन्मे व्यक्ति

1988 - नाबिला जमशेद - भारतीय लेखक थे।

1887 - लोचन प्रसाद पाण्डेय - प्रसिद्ध साहित्यकार थे, जिन्होंने हिन्दी एवं उड़िया, दोनों भाषाओं में काव्य रचनाएँ भी की थीं।

1965 - आदित्य पंचोली - हिन्दी सिनेमा के जानेमाने अभिनेता हैं।

1952 - टी. एस. ठाकुर - भारत के 43वें मुख्य न्यायाधीश रहे हैं।

1931 - निरुपा रॉय - प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री थीं।

1925 - प्रदीप कुमार - हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे।

1925 - गोपालदास नीरज - हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक एवं फ़िल्मों के गीत लेखक थे।

1924 - सेबास्तियन कप्पेन - एक धार्मिक विचारक थे।

1906 - विष्णु दामोदर चितले - प्रसिद्ध कम्युनिस्ट, स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रवादी एवं राजनीतिज्ञ थे।

1892 - जे.सी. कुमारप्पा - भारत के एक अर्थशास्त्री थे।

1809 - लुई ब्रेल - नेत्रहीनों के लिये 'ब्रेल लिपि' का निर्माण करने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति थे।

 

4 जनवरी को हुए निधन

2017 - अब्दुल हलीम जाफ़र ख़ाँ - संगीत की दुनिया में प्रसिद्ध सितार वादक थे।

2016 - एस. एच. कपाड़िया - भारत के 38वें मुख्य न्यायाधीश थे।

1994 - राहुल देव बर्मन (आर. डी. बर्मन) हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर संगीतकार थे।

1983 - झाबरमल्ल शर्मा - राजस्थान के वयोवृद्ध साहित्यकार, पत्रकार एवं इतिहासकार थे।

1967 - रामचंद्र कृष्ण प्रभु - गांधीजी के अनुयाई और प्रसिद्ध पत्रकार थे।

1931 - मोहम्मद अली - भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और शिक्षाविद थे।

1905 - अयोध्याप्रसाद खत्री - खड़ी बोली के प्रसिद्ध कवि थे।

4 जनवरी के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

लुई ब्रेल दिवस

 

सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच 10 जनवरी को अयोध्या मामले की सुनवाई करेगी

सुप्रीम कोर्ट में 04 जनवरी 2018 को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद (अयोध्‍या विवाद) पर सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले की अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी. 10 जनवरी से पहले इस मामले के लिए नई बेंच का गठन किया जाएगा.

 

अब तीन जजों के बेंच इस मामले की सुनवाई की करेगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई इस नई बेंच का गठन करेंगे. अब नई बेंच ही ये तय करेगी कि क्या ये मामला फास्टट्रैक में सुना जाना चाहिए या नहीं. सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ के सामने हुई.

इससे पहले 27 सितंबर 2018 को तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2-1 के बहुमत से 1994 के एक फैसले में की गई अपनी टिप्पणी पर नए सिरे से विचार करने के लिए मामले को पांच न्यायमूर्तियों की खंडपीठ के पास भेजने से इंकार कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गयी है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 01 जनवरी 2019 को ही कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने के बारे में निर्णय का सवाल उठेगा.

क्या था मामला?

इस्माइल फारूकी ने अयोध्या में भूमि अधिग्रहण को चुनौती दी थी जिस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि नमाज पढ़ना मस्जिद का अनिवार्य हिस्सा नहीं है.

मुस्लिम समुदाय इससे सहमत नहीं था और वह चाहता था कि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले पर दोबारा से विचार करे.

सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्षकारों की ओर से दलील दी गई थी कि मस्‍जिद में नमाज़ मामले पर जल्द निर्णय लिया जाए.

मुस्लिम समुदाय यह भी चाहता था कि मुख्य मामले से पहले 1994 के इस फैसले पर सुनवाई हो. अयोध्या जमीन विवाद पर फैसला तथ्यों के आधार पर होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रखा था. इसके साथ ही राम जन्मभूमि में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया गया था, ताकि हिंदू धर्म के लोग वहां पूजा कर सकें.

 गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2010 में जो फैसला दिया था उसके खिलाफ हिंदू महासभा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इससे पहले मामले की सुनवाई चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर कर रहे थे.

अयोध्या विवाद कब क्या हुआ?

वर्ष

विवाद

1949

बाबरी मस्जिद के अंदर भगवान राम की मूर्तियां देखी गई. सरकार ने परिसर को विवादित घोषित कर भीतर जाने वाले दरवाज़े को बंद किया.

1950

फ़ैज़ाबाद अदालत में याचिका दायर कर मस्जिद के अंदर पूजा करने की मांग की गयी.

1959

निर्मोही आखड़ा ने याचिका दायर कर मस्जिद पर नियंत्रण की मांग की.

1961

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की याचिका, मस्जिद से मूर्तियों को हटाने की मांग की गयी.

1984

वीएचपी ने राम मंदिर हेतु जनसमर्थन जुटाने का अभियान शुरू किया.

1986

फ़ैज़ाबाद कोर्ट ने हिंदुओं की पूजा हेतु मस्जिद के द्वार खोलने के आदेश दिए.

1989

राजीव गांधी ने विश्व हिंदू परिषद को विवादित स्थल के क़रीब पूजा की इजाज़त दी.

1992

कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिराया और अस्थाई मंदिर का निर्माण किया.

2003

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ASI को विवादित स्थल की खुदाई का आदेश दिया.

2010

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विवादित ज़मीन को तीन भाग में बांटने के आदेश दिए, अलग-अलग पक्षकारों ने हाइकोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

 

2011

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के फ़ैसले को लागू करने पर रोक रहेगी. साथ ही विवादित स्थल पर सात जनवरी 1993 वाली यथास्थिति बहाल रहेगी.

2016

विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण को लेकर सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.

2017

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा कि अयोध्या विवाद मामले को आपसी बातचीत से सुलझा लेना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिए गए इस्माइल फ़ारूक़ी फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के लिए तीन जजों की बेंच का गठन किया.

2018

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़े व

 

बता दें कि इससे पहले इस मामले की सुनवाई तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच कर रही थी. रिटायरमेंट से पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने इस मामले पर एक फैसले में कहा था कि यह मामला जमीन विवाद का है और इसे संवैधानिक बेंच को रेफर नहीं किया जाएगा.

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