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Current Affair 4.10.2018

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Created: 04 Oct 2018

The Royal Swedish Academy of Sciences said at the October 10 ceremony of Nobel Prizes that the three researchers who were awarded this year's Nobel Prize in chemistry "harnessed the power of evolution" to develop enzymes and antibodies that have led to new pharmaceuticals and biofuels -- as reported by AP.

They were honoured for "phage display of peptides and antibodies."

The 3 Nobel Prize in Chemistry winners' groundbreaking work

  • Frances Arnoldof the California Institute of Technology was awarded half the prize for conducting the first directed evolution of enzymes, leading to more environmentally friendly manufacturing of chemicals, including drugs, and in the production of renewable fuels.
  • George Smithof the University of Missouri and Gregory Winter of the MRC Laboratory of Molecular Biology in Cambridge, England, share the other half of the prize.

Smith developed a new way to evolve proteins and Winter used the method for evolving antibodies with the aim of producing new drugs.

These antibodies can neutralize toxins, counteract autoimmune diseases and cure metastatic cancer.

The first drug based on this work is used against rheumatoid arthritis, psoriasis and inflammatory bowel disease, the academy said.

"This year's Nobel Laureates in chemistry have been inspired by the power of evolution and used the same principles -- genetic change and selection -- to develop proteins that solve mankind's chemical problems," the academy said in a statement on awarding the 1 million dollar prize, as per NY Times.

Meet George Smith

Smith, 77, was a professor for 40 years at the University of Missouri at the Division of Biological Sciences.

George P Smith photographed at his home in Columbia, after learning he had won the 2018 Nobel Prize in Chemistry. (Image: AP)

  • Reached at his home in Columbia, Missouri, Smith was quick to credit the work of others in his prize

"Pretty much every Nobel laureate understands that what he's getting the prize for is built on many precedents, a great number of ideas and research that he is exploiting because he is at the right place at the right time," he told AP.

"Very few research breakthroughs are novel. Virtually all of them build on what went on before. It's happenstance. That was certainly the case with my work. Mine was an idea in a line of research that built very naturally on the lines of research that went before."

  • Smith said he learned of the prize in a pre-dawn phone call from Stockholm

 The 2018 Nobel Prize laureates for Chemistry are shown on the screen during the announcement. (Image: AP)

"It's a standard joke that someone with a Swedish accent calls and says you won! But there was so much static on the line, I knew it wasn't any of my friends," he said.

  • The million-dollar cash prize

He said he has "no idea" what he'll do with the prize money.

"We're going to give it away, I think. But we'll think hard how we'll do it. It's not just the money, it has a meaning well-beyond the money."

About the Nobel Prize in Chemistry

 US biochemical engineer Frances Arnold, speaks after winning the Millennium Technology Prize 2016. (Image: AP)

  • The Nobel Prize in chemistry honours researchers for advances in studying how molecules combine and interact
  • The 9-million-kronor (1.01 million-dollar) chemistry prize is the last of this year's scientific Nobel Prizes

नोबेल पुरस्कार चयन समिति ने 03 अक्टूबर 2018 को तीन वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान श्रेणी में पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की. इन वैज्ञानिकों में अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसेस अर्नोल्ड (Frances H Arnold), जॉर्ज पी स्मिथ (George P Smith) और ब्रिटिश अनुसंधानकर्ता ग्रेगोरी विंटर (Gregory P Winter)  शामिल हैं.

रसायन विज्ञान श्रेणी के नोबेल पुरस्कार विजेताओं में एक महिला और दो पुरुष वैज्ञानिक हैं. रॉयल स्वीडिश अकैडमी ऑफ साइंसेज ने कहा कि इस साल जिन तीन हस्तियों को रासायन के क्षेत्र में नोबेल प्राइज के लिए चुना गया है उन्होंने एंजाइम्स और ऐंटीबॉडीज को विकसित करने के लिए क्रमिक विकास की शक्ति का इस्तेमाल किया है जिससे नए फार्मास्युटिकल और बायोफ्युल का निर्माण हुआ है.

रसायन विज्ञान श्रेणी में नोबेल पुरस्कार 2018


•    चयन मंडल ने कहा कि क्रम विकास के सिद्धांतों का उपयोग कर जैव ईंधन से ले कर औषधि तक, हर चीज बनाने में इस्तेमाल होने वाले           एंजाइम का विकास करने के सिलसिले में तीनों वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया.

•    अर्नोल्ड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल (Nobel Prize 2018) जीतने वाली पांचवीं महिला हैं. 

•    उन्हें पुरस्कार राशि 90 लाख स्वीडिश क्रोनोर (करीब 10.1 लाख डॉलर या 870,000 यूरो) की आधी रकम दी जाएगी. शेष आधी रकम           स्मिथ और विंटर के बीच बंटेगी.  

•    तीनों वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रोटीन के इस्तेमाल के लिए क्रम विकास के उसी सिद्धांत का इस्तेमाल किया जिसके जरिए आनुवंशिक         बदलाव और चयन किया जाता है.

क्या है विशेष?

चयन अकादमी की नोबेल कैमेस्ट्री कमेटी के प्रमुख क्लेस गुस्तफसन ने जानकारी देते हुए कहा कि 2018 के नोबेल विजेताओं ने डार्विन के सिद्धांत को परखनली में उतारा. इन वैज्ञानिकों ने आण्विक स्तर पर क्रमविकास की प्रक्रियाओं की समझ का उपयोग किया और अपनी प्रयोगशाला में उसे मूर्त रूप दिया. उन्होंने कहा कि इसके तहत क्रम विकास की गति हजारों गुणा तेज की गई और इसे नये प्रोटीन के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया.

यूनिवर्सिटी ऑफ मिसूरी के जॉर्ज पी स्मिथ और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एमआरसी लेबोरेटरी ऑफ मॉलीक्यूलर बॉयोलॉजी के ग्रेगोरी विंटर  ने ‘फेज डिसप्ले’ नामक अनूठा तरीका विकसित किया. इसके जरिए बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस- बैक्टेरियोफेज का इस्तेमाल नये प्रोटीन के इस्तेमाल हो सकता है. उनके अध्ययन से अर्थराइटिस, सोराइसिस और आंत की सूजन जैसी बीमारी के लिए औषधि के साथ ही विषाक्त पदार्थों की काट के लिए एंटी बॉडीज (प्रतिरोधक) तथा कैंसर के इलाज में भी फायदा होगा.



फ्रांसेस एच. अर्नोल्ड का जन्म वर्ष 1956 में अमेरिका स्थित पिट्सबर्ग में हुआ. उन्होंने वर्ष 1985 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया से पीएचडी की उपाधि हासिल की. वे वर्तमान में कैलिफ़ोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में केमिकल इंजीनियरिंग, बायोइंजीनियरिंग एवं बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं.

जॉर्ज पी स्मिथ का जन्म 1941 को नॉरवॉक, अमेरिका में हुआ. उन्होंने 1970 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, अमेरिका से पीएचडी की डिग्री हासिल की. वे वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिसूरी, कोलंबिया, अमेरिका में बायोलॉजिकल साइंसेज़ विभाग में प्रोफेसर हैं.

ग्रेगोरी पी विंटर का जन्म 1951 लिसिस्टर, इंग्लैंड में हुआ. उन्होंने वर्ष 1976 में पीएचडी की डिग्री हासिल की. वे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, इंग्लैंड में एमआरसी लेबोरेटरी के अनुसंधान प्रमुख हैं.

 

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नोबेल पुरस्कार के बारे में

•    प्रत्येक वर्ष विज्ञान, साहित्य के क्षेत्र में महान अविष्कार करने वाले वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है. 

•    यह पुरस्कार रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंस की ओर से प्रदान किया जाता है. 

•    इसमें पुरस्कार स्वरुप 7,70,000 पाउंड की राशि दी जाती है. 

•    इस वर्ष साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जा रहा है क्योंकि नोबेल पुरस्कार का चुनाव करने वाली संस्था स्वीडिश एकेडमी की ज्यूरी की       एक सदस्य के पति यौन शोषण के आरोपों में घिरे हैं जिसके चलते स्वीडिश एकेडमी विवादों में घिरी हुई है